hindustan opinion column 03 may 2022


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Naman Dixitनिभूति नारायण राय, वर्व आईपीएस अधिकारीMon, 02 May 2022 10:42 PM

गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी को पिछले दिनों जमानत देते समय बारपेटा के न्यायाधीश ने लोकतंत्र और पुलिस को लेकर जिस तरह की टिप्पणियां की हैं, वे हम सबकी आंखें खोलने के लिए पर्याप्त हैं। जिग्नेश को सबसे पहले असम के एक जिले की पुलिस ने उनके द्वारा किए गए कुछ ट्वीट्स के आधार पर गिरफ्तार किया, और जब उन्हें उसमें जमानत मिल गई, तो उन्हें हिरासत में रहते हुए ही एक महिला पुलिसकर्मी से दुर्व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया । सत्र न्यायाधीश ने इस पूरे मामले को फर्जी करार देते हुए असम पु ि उन्होंने पुलिस की अराजकता पर नियंत्रण करने का अनुरोध किया है। न्यायाधीश की यह टिप्पणी सबसे महत्वपूर्ण है कि मुश्किल से हासिल लोकतंत्र को पुलिस-राज में तब्दील नहा पिछले कुछववषोंषोंषोंषोंषोंषोंषोंषोंयकककयययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययधि यहटिपवपूणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणणबहुतपणीणणणणणणणणणणबहुतपणीणणणणणणणणणबहुतबहुतपणीणणणणणणणणणबहुतबहुतबहुतणणणणणणणणणबहुतबहुतपणीणणणणणणणणणबहुतबहुतणणणणणणणणणणबहुतबहुतबहुतणणणणणणणणणबहुतबहुतबहुतणणणणणणणणणणबहुतबहुतणणणणणणणणणपणी

पुसम पुलिस का यह आचरण पुलिस में दिन-ब-दिन बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप और शीर्ष पुलिस नेतृत्व द्वारा यदि ऐसे ऐसे ऐसेविधऐसेयकेे पूपूेे देशहैे हैहैेे हैहैेे जहैेेहैमेंफि जफििक हैआमिकिक जआमयिक सकतआमयिकिकिकहैकेहोहोहैकीकीकीकीकीकीकीकी पुलिस का अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल की कामना किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। हाल ही में पंजाब पुलिस ने भी पिलखुआ में कवि कुमार विश्वास के घर पर इसी तरहए याद रहे कि असम और पंजाब में भिन्न दलों की सरकारें हैं, पर अपने विरोधियों से पुलिस के जरिये निपटने की भूख
पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल व्यक्तिगत आजादी की सांविधानिक गारंटी को किस तरह बाधित करता है, यह असम जैसी घटनाओं से बखूबी समझा जा सकता है, पर इससे भी ज्यादा चिंताजनक सांप्रदायिक उन्माद की वे घटनाएं हैं, जो पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न भागों में घटी हैं और जिनसे निपटने में असफलता के पीछे एक जैसा ही राजनीतिक ह यह हस्तक्षेप अलग-अलग दलों की सरकारों द्वारा समय-समय पर किया ा
Phदेश कीआजदीदीदी केवें वेंवे मेंमें जिसे के हमपड़ेंगे मेंऔ में मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंऔ मेंकेसों मेंके मेंकेे मेंकेे मेंकेे में केकेे मेंकेे में उसकोे को उस उसआभवंचित उस उस उसउसवंचित को उस उस उस उस उस उसउस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में हम पात्र थे। यह अनायास नहीं हुआ कि इस वर्ष रामनवमी के अवसर दर इसके लिए हम पिछले काफी दिनों से तैयारी कर रहे थे। बस बीच उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव हुए हैं, जिनमें खुलकर हिंदू-मुस्लिम ाेला गया। इन्हीं के दौरान प परस्पर घृणा अपने उरूज पर थी, देश के कई हिस्सों इन सम्मेलनों में जैसे वक्तव्य दिए गए या हथियारों का जिस तरह से प्रदर्शन किया गया, उसमें बहुत कुछ ऐसा था, जिनकी किसी संत सम्मेलन में अपेक्षा नहीं की जा सकती थी। ईर्म संसदों और माहौल में काफी जहर घुल जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने रुड़की में प्रस्तावित ररम जितनीजितनीपशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशभ Aभभशककक थदियउतति अभउतउतउतउतमम पिछलेमेंपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेपिछलेसकेपिछलेपिछलेपिछलेतेजकतेजकतेजकतेजकतेजक न्यायपालिका से भी जैसी सक्रियता की अपेक्षा की जा सकती है, वैसी नहीं दिखाई दी। हरिद्वार के पहले धर्म संसद के दौरान किए गए भाषणों को लेकर कई व्यक्ति और संगठन सर्वोच्च न्यायालय गए, पर किसी प्रभावी कार्यवाही के अभाव में रुड़की के प्रस्तावित कार्यक्रम के पहले कई और कार्यक्रम हुए और उनमें एक से एक बढ़कर भड़काऊ भाषण होते रहे।
तिस तरह के दंगे-फसाद पिछले दिनों हमारे यहां हुए हैं यदि हम विश्व की एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं, तो हमें अपना घर सुधारना होगा। ईाथ्ट्र आर्थिक महाशक्ति नहीं बन सकता, यदि वहां प्राकृतिक न्याय के सर्वमान्य सिद्धांतों का पालन न ुु ि ि ि ि ि ि ि य य य य य य य य य य ि य य य य ि ि ि य य ि य य ि ि ि य ि स स य स स स स स स स स स स स स स स स स स स स स स स पुलिस द्वारा खुद ही न्यायाधीश की भी भूमिका हथियाने की चाहत से फर्जी एनकाउंटर का जन्म होता है। त्वरित न्याय की यह पद्धति हमारे समाज को बर्बर और असभ्य ही बनाएगी।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पुलिस राज्य का सबसे दृश्यमान अंग होती है। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान जब कफ्र्यू लगा हो, तब तो अक्सर सन्नाटा भरी न यदि वह समाज के किसी तबके का विश्वास जीतने में असफल होती है, ोइ एारत एक बहुभाषी और बहुधार्मिक समाज है और इस विविधता की रक्षा में ही इसका कल्याण ै धार्मिक, जातीय या भाषिक तनाव के दौरान पुलिस के निष्पक्ष और पेशेवर आचरण से ही भारतीय राज्य की न ष दुर्भाग्य से हालिया दंगों में पुलिसकर्मी अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने का प्रयास करते से दिखते हैं।
पुलिस का अपने संकीर्ण हित में इस्तेमाल करने को व्यग्र राजनीतिज्ञों को समझना होगा कि इसका दुरुपयो पुलिस को गैरकानूनी आचरण के लिए प्रेरित करने वाले भूल जाते हैं ि स स स स स स स स दिलचस्प यह है कि जिन नेताओं ने विपक्ष में रहते हुए पुलिस की बर्बरता झेली है व
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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