Hindustan Opinion Column 09 April 2022


75 विलेख के डिजिटल डाटा को 75 वर्षों तक संरक्षित रखा सा सकेगा, पर यदि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो इस सूचना को अपराध नियंत

हरबंश दीक्षित, विधि विशेषज्ञNeelesh Singh

Fri, 08 Apr 2022 09:12 PM

बहस की शाश्वत परंपरा और अनुभवों से लगातार खुद को बेहतर करते रहना लोकशाही की सबसे बड़ी ताकत है। यही वजह है कि दंड प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022 के संसद से पारित हा जाने के यह कानून 1920 क इसी तरह के कानून की जगह लेगा। इसकेइसकेइसकेयमयम से minssmothers सेअभियुककककककककककककककककककककककतियोंहैहैहैीकृतगै चसेीकृत चऔीकृत चऔीकृत निजीऔऔ निजीऔबबबबबबयोलॉजिकल जऔ. इसे संरक्षित करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो को दी गई है। 75 विलेख के डिजिटल डाटा को 75 वर्षों तक संरक्षित रखा सा सकेगा, पर यदि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो इस सूचना को अपराध नियंत्रण करने वाली अन्य एजेंसियों के साथ साझा कर सकेगा। ा ि ं ं ा ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ृ ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ं ि ं ं बायोलॉजिकल सैंपल में खून व बाल के नमूने, लार व उनका डीएनए विश्लेषण और उसका सैंपल शामिल है। विकृत व्यक्ति को ऐसे नमूने इकट्ठा करने का अधिकार होगा। नमूना देने से इनकार करना दंडनीय जुर्म माना जाएगा।
थमेरिका तथा ग्रेट ब्रिटेन में इस तरह का कानून पहले से ही है और उनके केंद्रीय ृ ने यहां महाराष्ट्र में भी यह प्रयोग हुआ है और इससे अपराध पर अंकुश लगाने में उन्हें इन्हीं अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार को उम्मीद है कि अपराध नियंत्रण की दिशा में यह कानून मील का पपथ बदलतेबदलतेिवेश मेंमेंिवेश ककयवहयवहयवहयवह उनकेउनके डआवश होतेड होतेह होतेह होतेह होतेतियों जटिलतियों होतेतियों होतेतियों होतेतियों होतेतियों होतेकी होतेउन होतेकीतियों कीकी कीकीतियों कीकीक जकीकेके जकीकेके जकीकेके जकीजज जजजज सकेकी सकेकीसकेतियोंतियोंसके
1920न 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 न ा ि ि ि ा ा ा ा ा ा ा 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 1920 मौजूदा विधेयक में इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। अब पुलिस थाने का इंचार्ज, हेड कांस्टेबल और उससे ैंे रैंक के पुलिस अधिकारी थे क ल Phकई को को इसइस इसइस इसइस इसआपतति हैहैहैहैहैहै उनकनिचलीयियोंियोंियोंियोंियों दबआसययकेनन दबवयके नहींवबनीके नहींवबनीकेके बनीबनी कीवबनीुपयोगकी लोगों का यह भी मानना ​​है कि इस तरह व्यक्तिगत डाटा इकट्ठा करने का निर्णय बहुत संवेदनशील काम है। इसमें लोगों की निजता का अधिकार और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लगती है, इसलिए डाटा या सूचना एकत्रित करने का निर्देश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट या जिम्मेदार पुलिस व जेल अधिकारियों को ही होना चाहिए.
ए ए ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ध ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु ु य य य य य य इसके अलावा, उन लोगों की पहचान से संबंधित डाटा भी इकट्ठा किया जा सकता है, तसका तात्पर्य यह हुआ कि यदि कोई व्यक्ति अभियुक्त नहीं है और तफ्तीश के लिए उसे गिर फग त मानवाधिकार संगठनों को आशंका है कि “मैं” शब्दावली इतनी व्यापक है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है, क्योंकि सिर्फ शक के आधार पर पकड़े गए लोग भी इसके दायरे में आ जाएंगे और यदि उन्हें बेवजह प्रताड़ित किया जाता है, तो सरकार के खिलाफ बेवजह आक्रोश बढ़ेगा।
अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन में भी इस रस तरह के कानूनों को लेकर शुरू में वही आशंकाएं थीं ज निजता के अधिकार की भी अपनी एक सीमा है। यह एक व्यक्तिगत अधिकार है, जबकि अपराध पर नियंत्रण करना सामाजिक जरूरत है। समाज का हित और उसके लिए अपराध पर अंकुश लगाना निजी अधिकारों से ज्यादा हजवपू है। हमारे देश में अपराधों में दोष सिद्धि की दर अन्य देशों से बहुत कम है। ,से, अमेरिका में प्रत्येक 100 में से 99.8 अभियुक्त को सजा मिल जाती है, जबकि भारत में बमुश्किल 67 ो यहां साक्ष्य के अभाव में अधिकतर अपराधी छूट जाते हैं। अपराधियों ने बदलते दौर में अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। इसलिए उन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाना बहुत जरूरी राधी संबंधी डाटाबेस बहुत मददगार साबित होगा।
यहां यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में पुलिस की कार्य-ं स स ा ष क क ा ल ल ल ल ल ल ल क क क छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ छ ी छ क क क क क क ी ो ो ो ो ो ो ु ो ु ने यहां पेशेवर निष्पक्षता तक पहुंचने में कुछ दशकों का समय लग सकता है। क्छे कानून या अच्छी व्यवस्थाएं तभी कारगर होंगी, जब हम पुलिस सुधार करेंगे और पुलिस को कानून एवं समाज के प्रति पसससससससससवित कसदसदसदियों कोसदसदसदियोंवकवकवकवकवपूवकवकवककेके गयकिएयययणणणभकेके गयकिएयणयणणभभकेहेंकिएेेेेहैहैहै) उपसे उपाय होने चाहिए कि दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से आम लोगों को बचाया जा सके। स्वस्थ लोकशाही के लिए यह जरूरी है, ताकि शासन पर जनता का भरोसा कायम रहे।
विधेयक की धारा सात में केंद्र व राज्य सरकारों को इसे लागू करने के लिए नियम बनाने का ििा धारा नौ में केंद्र को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह इसे लागू करने में आ रही दिककक ंह मंत्री ने भी लोकसभा में इस विधेयक को संसद उम्मीद है, यह समिति इन त्रुटियों को दूर करके इस महत्वपूर्ण कानून के माध्यम से अपराध नियंत्रण की पहल को आगआग बढ़
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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