Hindustan Opinion Column 12 February 2022


देवेंद्र सिंह असवाल, पूर्व अपर सचिव, लोकसभाNeelesh Singh

Fri, 11 Feb 2022 09:56 PM

ारत सरकार द्वारा आईएएस कैडर नियमों में प्रस्तावित परिवर्तन पर विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो बाकायदा जन-आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दे डाली है। पश्चिम बंगाल के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रिया 40 से अधिक पूर्व नौकरशाहों और कई सांसदों ने भी इसके बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लि बदलावों के विरोधी इसे भारत के संघीय ढांचे पर प्रहार मानते हैं।
प्रस्तावित बदलावों के बाद इसकी प्रबल आशंका है कि आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति में बसके बाद ऐसे ही संशोधन अन्य अखिल भारतीय सेवाओं में भी हो सकते हैं। आईएएसआईएएसगगगगगनियम केमौजूदमौजूदित संशोधनसव निकेंदतिनियुकी ससी केसी केसी केभीती मेंभीती मेंभीती मेंभीती मेंभीती मेंभीती मेंभीती होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगभीती होगभीती होगहोगी होगहोगी होगभीती होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगहोगी होगभीती होगभीती
रककजजों ककतों तती हैहै किकिको Aकेएकी अधिकअखिलकोी अधिकससी अधिकससी मेंससी मेंससीीित मेंसक मेंससकेंदकेंदितककककककककसकती यही नहीं, उस अधिकारी को विवश होकर नया कार्यभार निर्धारित अवधि में ग्रहण करना होगा। नियमों में ऐसा संशोधन ‘भय की मनोवृत्ति’ पैदा करेगा, मनमाने निर्णय को बढ़ावा देगा और अधिकार्य सी स्थिति में उत्पीड़न और प्रतिशोध की राजनीति की काफी संभावना है। ई स स ह न न न न न न न न न न न न न क क क क क क क क क क क क क क क क क ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह
Kingdomsकेंदमिकषणमिकषणषणषणषणषणषणषणषणषण एवं पसपषपषट कियकियतिनियुकतिनियुकयें केनिशतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुकतिनियुक के लिए लिएभेजियोंियोंियों को. यह भी कहा गया है कि अधिकारियों को केवल राज्यों के परामर्श से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा, लेकिन ‘केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों की संख्या आपसी परामर्श से तय हो जाने के बाद केंद्र को उन अधिकारियों की केंद्र में पदस्थापना का अधिकार होना एहिए। ‘
लेकिन अक्सर ‘वाणी और व्यवहार’ में विरोधाभास देखा जाता है। ईसे कई उदाहरण हैं, जब केंद्र द्वारा राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना स्थानांतरण जून, 2001 मेंमेंतमिलनडु पुलिसपू नेपूयमंतयमंतीीीी मकेीीफफफफफफफफफतततततततततततततततीीीीीी थे. इससे नाराज होकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को छापेमारी से जुडे़ तीन आईपीएस अधिकारियों ो ब ् य य य य य य य य य य य य य ल य ल य ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल ल क क क य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य य एक अन्य मामले में 1987 बैच के आईएएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय का कार्यकाल केंद्र सरकार की सहमति से तीन महीने की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था, पर जिस दिन वह सामान्य रूप से सेवानिवृत्त होते, उसी दिन उन्हें अचानक दिल्ली ं ंदस्थापना का आदेश केंद्र ने जारी कर दिया। राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया और न ही अधिकारी क यह भी नहीं बताया गया कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद तीन महीने की अवधि के लिए दिल्ली में उनकी इतनी तत्या
अक अन्य मामला दिसंबर, 2020 केंद्र ने कहा कि उन तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाए, जो उस समय सुरक्षा-व्यवस्था के प्रभारी थे, जब भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर 10 दिसंबर, 2021 को कथित तौर पर तृणमूल समर्थकों द्वारा कोलकाता के बाहर हमला किया गया ।ा। लेकिन राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए इनकार कर दिया।
Commuts दलील है कि कि किपतिनियुकतिनियुकत सिविलसत अधिकसनेियों अधिकसियों कोस कोकमीियों कोशक कोशक कोमें की संशोधन ककियने कोको विनियमों के अनुसार, राज्यों को केंद्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रत्येक संवर्ग में 40 प्रतिशत वरिष्ठ पदों को निर्धारित करना चाहिए, लेकिन राज्यों में सीडीआर की कमी 61 से 95 प्रतिशत के बीच है. संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उपसचिवों की विशेष रूप से कमी है। केंद्र सरकार के पास आईपीएस अधिकारियों की कमी है। र व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व व ि व ि व ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि ि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का चयन संघ लोकसेवा आयोग द्वारा किया जाता है और विभिन्न राज्यों को आवंट संघ व राज्य, दोनों की ‘साझा संपत्ति’ ह
राज्यों की दलील यह भी है कि मनमाने तरीके से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति उनके विकास कार्यों को बाधित करेगी औ य तथयह यह भी भी हैहै किआमतौआमतौ आईएएस वआईएएससंयुकतिनियुकीीीी पकेतिनियुकतिनियुकत पपतिनियुकतिनियुकतिनियुकत पनीचेतिनियुकतिनियुकहें पएंतिनियुकहें पमिलतींकेते कयके कमिलतींमिलतींति डीएमयके वे के डीएम डीएम ययतिनियुकहें वेमिलतीं के डीएम डीएम ययतिनियुकहें केमिलतींमिलतींमिलतीं में मेंमिलतींते मेंमिलतींकेमिलतीं
इसमें कोई दोराय नहीं कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लाने सा उनका पूरा सेवाकाल एक ही राज्य कैडर में सीमित नहीं रह सकता। लेकिन केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में हितधारकों से उचित परामर्श भी लागू होना चाहिए। सददर पटेलने नेनेने 1948 मेंमेंतीय थचतीय नियंतचण नियंतनियंतण नियंतपूण नियंतहोणण नियंतचण नियंतहोणण चचण नियंतहोण यहपूणण चचण यहहोणण चची यहपूीण चची यहहोी यहपूी यहपूी यहपूी यहपूी यहपूी यहपूी हैपूी हैपूी हैपूी हैती हैसकती हैसकती हैनहींी हैनहींनहीं हैनहींनहीं हैनहींनहीं हैनहींनहीं. ‘ उन्होंने सिविल सेवकों को ‘भारत का स्टील फ्रेम’ कहा था। चुनावी राजनीति की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए यह और जरूरी हो गया है कि अखिल भारतीय सेवाओं के ‘स्टील फ्ं
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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