Health budget 2022 expert says pharmaceutical make in india medical devices industry is neglected in aam budget dlpg


नई दिल्‍ली. केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को केंद्रीय बजट 2022 पेश किया. जिसमें उन्‍होंने सभी क्षेत्रों के लिए घोषणाएं की. स दौरान पेश किए गए स्‍वास्‍थ्‍य बजट में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर विशेष ध्‍यान दिया और देशभर में 23 टेलीमेंट इतनइतन ही नहीं पहले पहले से चले आ हेकोसीनेशनसीनेशनडय उपयोग हुएभी ईभी भीभी तैयतैयटम केलिएटम तैयघोषणटम कीघोषणटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीघोषणटम कीसिसटम कीसिसटम कीघोषणटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीसिसटम कीघोषणने कीसिसटम कीसिसने पिछले साल के मुकाबले इस बार स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र को 16 फीसदी ज्‍यादा बजट आवंटित किया गया है. बसके बावजूद स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र से जुड़े लोगों ा ा इनमें मेडिकल उपकरण इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों ने निराशा जताई है.

इस बजट को लेकर स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आम बजट आत्मनिर्भर भारत की बात तो की गई है लेकिन स्वदेशी कंपनियों के लिए सरकार ने कुछ नया नहीं किया जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके. हिंदुसहिंदुसतततनन लिवलिव लिव एमडीके मेडिकलइंडसइंडसटटीी सेकोीी सेकोीीीीीी सेकोीीीीीीीीी सेमेडिकलीीीीीीीीीीीीीीणों मेडिकलमेंीी कमेंीणों कपुी आयमेंचीनचीन कपुीी जर जर्मनी आदि देशों से किया जाता है और यह पिछले पांच साल ंांच साल में अकेले चीन से ही पिछले पांच साल में आयात में 74 फीसदी से ज्‍यादा की बढ़ोत्‍तरी हुई है. भकि भारतीय कंपनियां भी ये उपकरण बना सकती हैं.

राजीव नाथ कहते हैं कि भारत सरकार ने पिछले साल देश ंार बड़े डार बड़े ंनमें हर एक पार्क को करीब 100 करोड़ का फंड दिया जाना था. इनइनकोंकोंकोंमनिren आतआतमनि मेंभमनि स्‍वदेशी इंडस्‍ट्री को बढ़ावा देना चाहती है. इतनइतन नहींनहींोनोनोनोनोनके केजयययय की इनके इनकेइनकेत इनकेइनकेत इनके इनके लिएहैलिएत इनके इनके मेंइनकेसत इनकेमें इनके मेंलिएलिएलिए इनकेमेंत इनके मेंइनकेत आयहै इनके मेंहैप कियऔ कियइनकेप कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ कियऔ इंडिया को बढ़ाने के लिए कोई बजट या रूपरेखा की चर्चा की है.

नाथ कहते हैं कि जब तक आयात को नहीं घटाया और निर्यात को प्रोत्‍साहित नहीं किया जाएगा तब तक भारत में स्‍वदेा ऐसे में मेक इन इंडिया का सपना भी पूरा होने में परेशानी आएगी. ध्‍यान देने वाली बात है कि अभी कोरोना गया नहीं है बल्कि विश्‍व के लगभग हर देश में मौजूद है. वने वाले समय में भी मेडिकल डिवाइसेज की जरूरत पड़ सकती है. ंारत में 50 से ज्‍यादा ऐसे उपकरण हैं जिनपर जीरो आयात शुल्‍क है जो कि आयात को बढ़ावा देने का प्रमुख कारण है.

फार्मा इंडस्ट्री को स्वास्थ्य बजट से काफी उम्मीदें थीं, बजट में इस बार आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में बनने वाले मेडिकल उपकरणों के लिए कुछ अधिक बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए थीं, इसके कस्टम ड्यूटी में बदलाव किया जा सकता था, जिससे निर्यात आसान हो सकता था. पपपमुख ममंगों पधयययनननननमुखमुख थपिफिफ घटचणों मेंकणों घटकणों घटलकणों चलकणों चलकणों चकणों चलककणों 18 18प 18पप 18पपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपपप 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 18 जधणों जपमुखमुख पपपमुख पपमुखमुख दियधयययनजपप थजिनमेंजिनमें जिनमेंककणों घटपक घटपकणों मेंलकक जीएसटीपकणों चलककणों चलककणों चलककणों 18.2ths उपकरणों के शोध और रिसर्च कार्य पर भी छूट दी जा सकती थी जो नहीं किया गया.

Tags: Budget, Health, Import-Export, Medical Devices



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *